story in hindi for kids
1. चंदन का पेड़ story in hindi for kids
महेशपुर नामक गांव में एक किसान रहता था उसके दो बेटे थे महेश और रमेश। उसके छोटे बेटे का नाम महेश था और बड़े बेटे का नाम रमेश।
बड़े रमेश का पढ़ाई में मन नहीं लगता था तो पिताजी ने उसे एक साइकिल खरीदी थी। रमेश की साइकिल देखकर महेश को जलन होने लगी उसने अपने पिता से जीत की कि वह उसे मोटर गाड़ी खरीदें।
उस किसान को अपने छोटे बेटे की जिद के आगे हार माननी पड़ी और उसने उसे गाड़ी खरीदी।
कुछ दिनों बाद जब किसान ने देखा कि उसका बड़ा बेटा पढ़ाई लिखाई में अब एकदम बेकार हो चुका है और वह आगे पढ़ने लायक नहीं है। किसान ने अपने बड़े बेटे की शादी कर दी।
उनका बड़ा बेटा बहुत मेहनती था वह खेती बारी करता था और परिवार का गुजर-बसर करता था।
पढ़ाई खत्म होने के बाद छोटे बेटे महेश ने अपने पिता से शहर में पढ़ने की मांग की।
किसान ने कहा " बेटा शहर में पढ़ने से क्या होगा झूठ मूठ का अधिक खर्चा भी लगेगा गांव में भी कॉलेज हैं तुम यहीं पर पढ़ लो।"
महेश ने अपने पिता से कहा " नहीं मुझे शहर में ही पढ़ना है आप मुझे शहर में पढ़ने के लिए भेजिए वरना मैं खाना नहीं खाऊंगा।"
किसान को अपने छोटे बेटे महेश की जिद माननी पड़ी और उसने उसे शहर में पढ़ने के लिए भेज दिया। शहर की चकाचौंध में महेश का पढ़ाई में बिल्कुल मन नहीं लगता था वह इधर-उधर घूमता रहता, फिल्में देखता, अपने दोस्तों के साथ घूमा करता था।
इसी तरह महेश ने 2 साल बर्बाद कर दिए। एक दिन किसान के बड़े बेटे रमेश ने महेश को फोन किया और कहा कि तुम जल्दी से घर आ जाओ पिताजी की तबीयत बहुत खराब है।
छोटे बेटे महेश ने कहा " मैं अभी नहीं आ सकता हूं मुझे बहुत काम है।" कुछ दिनों बाद किसान की मृत्यु हो गई।
1 दिन छोटे बेटे महेश ने रमेश को फोन किया और कहा कि " आप इतने कम पैसे क्यों भेज रहे हैं आप तो जानते ही हैं कि शहर में कितने खर्चे होते हैं।"
बड़े बेटे रमेश ने कहा " इस बार खेती भी अच्छी नहीं हुई इसलिए ही कम पैसे थे मुझसे जितना हो पा रहा है मैं तुम्हें पैसे भेज रहा हूं।"
कुछ दिनों बाद छोटा बेटा महेश शहर से आया। महेश को देखकर रमेश ने कहा- " बड़े दिनों बाद महेश वह भी बिना बताए।"
महेश ने कहा " हां मुझे थोड़ा काम था इसलिए बिना बताया आ गया।"
महेश ने रमेश को एक कागज दिया और कहा की यह मेरे कॉलेज का कागज है इस पर आपके हस्ताक्षर चाहिए।
रमेश ने महेश पर विश्वास करके हस्ताक्षर कर दिए।
इसके बाद महेश हंसने लगा उसने रमेश से कहा की " अब वह अपनी पत्नी को लेकर वहां से निकल जाए। उसने रमेश को बताया कि जिस कागज पर उसने अभी हस्ताक्षर किए हैं उस पर अंग्रेजी में लिखा हुआ था कि रमेश अपनी सारी जायदाद महेश को देता है।"
इस प्रकार महेश ने रमेश को धोखा दिया। रमेश बहुत दुखी हुआ और वह अपनी पत्नी को लेकर वहां से निकल गया। रास्ते में ही उसने एक झोपड़ी बांध ली।
रमेश की पत्नी ने कहा " अब हम लोगों का क्या होगा अब हम लोग कहां से खाएंगे और जिएंगे।"
रमेश बोला परेशान मत हो मैं जंगल में जाऊंगा लकड़ियां काट लूंगा और उसे बेचकर मुझे जो पैसे मिलेंगे उससे हम लोग गुजर-बसर करेंगे।
अगले दिन रमेश जंगल में गया उसने लकड़ियां काटना प्रारंभ किया। काफी देर तक लकड़ियां काटने के बाद बहुत थक गया और उसे प्यास लग गई। वह पानी की तलाश में इधर-उधर घूमने लगा तभी कुछ दूर पर उसे कुआं दिखा वह वहां पर गया।
कुए पर जाने रमेश ने महसूस किया कि कुएं से बहुत ही अच्छी सुगंध आ रही है। उसने देखा तो कुएं में पानी नहीं था। वह कुआं सूखा हुआ था परंतु वहां पर एक चंदन का पेड़ था।
रमेश ने सोचा कि " मैंने सुना था कि चंदन की लकड़ियां बहुत ही महंगी बिकती हैं। रमेश तुरंत कुएं में कूद गया। अंदर जाने के बाद उसने चंदन की लकड़ीया काटी और ले जाकर उसे बाजार में बेच दी। उन लकड़ियों को बेचने के उसे ₹50000 मिले।" रमेश बहुत खुश हुआ और वह अपने घर गया।
अगले दिन फिर से रमेश ने चंदन की लकड़ीया काटी और उसे बाजार में भेज दिया। इस तरह कुछ दिनों तक करने के बाद रमेश के पास खूब सारे पैसे हो गए। इन पैसों से रमेश ने खुद का अपना घर खरीद लिया, खेत खरीद लिए और एक ट्रैक्टर भी खरीद लिया।
दूसरी तरफ महेश को खेती करने आता ही नहीं था। वह उन खेतों से कोई पैसा नहीं कमा पा रहा था। उसकी हालत एकदम खराब हो गई थी उसके पास खाने के पैसे भी नहीं थे।
महेश ने अपने सारे खेत रमेश को बेच दिए। खेत बेचने के बाद महेश को जो पैसे मिले उसे से महेश का कुछ दिन तक जीवन चला परंतु पैसे खत्म होने के बाद उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं था। उसकी हालत बहुत ही दयनीय हो गई थी।
एक दिन रात को महेश जाकर रमेश की खिड़की से देखने लगा। उसने देखा कि रमेश और उसकी पत्नी खाना खा रहे थे। महेश ने उन दोनों को बात करते हुए सुना कि आज वह जो कुछ भी हैं जो भी उनके पास धन है वह सिर्फ जंगल में मौजूद चंदन के पेड़ की लकड़ियों के वजह से हैं।
महेश समझ गया कि कल से वह भी जाएगा जंगल में और चंदन की लकड़ियों को लाकर बेच कर पैसे कमाएगा।
अगले दिन जब महेश जंगल में गया उसे खूब खोजने के बाद वह कुआं मिला। उसने देखा कि अंदर चंदन का पेड़ था और कुआं एकदम सूखा हुआ था। महेश तुरंत कुएं में कूद गया।
शिक्षा:- 1.हमें कभी भी किसी को धोखा नहीं देना चाहिए।
2.हमें हमेशा बड़ों की इज्जत करनी चाहिए तथा पैसों का घमंड नहीं दिखाना चाहिए
2. कटोरी का लालच story in hindi for kids
एक बार की बात है एक लकड़हारा था। वह जंगल में लकड़ियां काटने के लिए गया। उस दिन वह अपने घर से पानी ले जाना भूल गया था। दोपहर में धूप हो गई और लकड़िया काटते काटते हैं उसे प्यास लग गई।
वह लकड़हारा पानी की तलाश में पूरे जंगल में घूमने लगा। उसे पानी का कोई ठिकाना नहीं मिला ना तो कोई कुआं और ना ही कोई नदी। अंत में हार कर थक कर वह आकर एक पेड़ के नीचे बैठ गया।
कुछ देर बाद उसे आवाज सुनाई दी। उसे आवाज से पता चला कि आस पास जरूर कोई नदी है उसे आवाज नदी के पानी की बहने की सुनाई दी थी।
लकड़हारा उस नदी के आवाज का पीछा करते हुए आगे बढ़ता गया। काफी दूर तक चलने के बाद उसने देखा कि वहां पर एक नदी बह रही थी। उसने सोचा कि मैं यहां से पानी पीकर अपनी प्यास बुझा लूंगा।
जब वह नदी के पास पानी पीने के लिए गया उसने सोचा कि क्यों ना मैं पत्ते से एक कटोरी बनाना उसे आसान रहेगा। उसने देखा कि सामने एक पेड़ था उसने वहां से पेड़ के पत्ते लिए और उसे कटोरी बना ली।
कुछ देर बाद उसने सोचा एक लोहे का कटोरा हो जिससे मैं पानी पी सकूं। आसपास वह लोहे की कटोरी खोजने लगा तभी उसे सामने एक लोहे का कटोरा मिल गया।
अब उसके मन में और इच्छा जागी उसने सोचा कि क्यों ना एक पीतल का कटोरा होता जिससे मैं पानी पीता। वह पीतल के कटोरे के खोज में कुछ दूर आगे गया। काफी आगे तक चलने के बाद उसे पीतल का कटोरा मिल गया।
अब उस लकड़हारे ने सोचा लगता है या कोई मायावी जंगल है यहां पर जो मांगो वह पूरा हो जाता है। लकड़हारे ने सोचा कि काश मुझे एक चांदी का कटोरा मिल जाता है जिससे मैं पानी आसानी से पी लेता।
वह चांदी की कटोरी की खोज में भ्रमण करने लगा काफी दूर तक चलने के बाद उसे एक चांदी का कटोरा पेड़ के पीछे मिला।
जब लकड़हारे को चांदी की कटोरी मिल गई तू उसके मन में और अधिक लालच आया। ने सोचा कि अगर यहां पर चांदी की कटोरी है तो जरूर ढूंढने पर मुझे सोने की कटोरी भी मिल जाएगी।
लकड़हारा और सोने की कटोरी को ढूंढने लगा। वह बहुत दूर तक ढूंढते हुए चला गया। उसके पैरों में छाले पड़ गए परंतु वह हार नहीं माना। लकड़हारे ने सामने पड़ी एक डंडी उठाई और उसके सहारे ही चलने लगा।
काफी दूर तक जाने के बाद उसे सोने की कटोरी भी मिल गई। लकड़हारे ने सोचा अब मैं सोने की कटोरी ले लिया और अब वह सोचा कि अब मैं जा कर नदी में आराम से सोने की कटोरी से पानी पी लूंगा।
लेकिन लकड़हारा सोने की कटोरी की तलाश में उस नदी से बहुत ही अधिक दूर चला गया था। लकडहारे को बहुत तेज से प्यास लग रही थी और उसे चक्कर भी आ रहा था। वह किसी तरह चलता रहा सोने की कटोरी को लेकर।
नदी के पास तक पहुंचने के बाद वह इतना थक गया था कि उसे चक्कर आ गया और वह गिर गया। लकड़हारा गिरने के बाद भी उस सोने की कटोरी को अपने हाथ में पकड़ा ही रहा।
उसे गिरा हुआ देखकर नदी में से हंसने की आवाज आई और नदी ने उस लकड़हारे से बोला तू कितना बेवकूफ है पानी पीने के लिए तो तेरे दोनों हाथ ही काफी थे मगर तू लालच के वजह से इतना दूर गया सोने के कटोरी को पाने के लिए। अब तू देख तेरे पास सोने की कटोरी तो है परंतु तू पानी पीने लायक नहीं है।
लकड़हारा का हुआ था कि वह बेहोश हो गया और पानी ना पीने के वजह से उसकी वहीं पर मृत्यु हो गई।
शिक्षा :- हमें लालच नहीं करना चाहिए जो हमारे पास है वह बहुत है।
3. तोता और कौआ story in hindi for kids
एक तोता था। वह हरे रंग का था और उसकी लाल चोंच थी। उसे उड़ना बहुत पसंद था। एक दिन तोता ऊंचा उड़ रहा था। वह जंगल के पास से उड़ रहा था। उसने नीचे एक आम के पेड़ को देखा।
उस आम के पेड़ की शाखाओं से प्यारे पीले आम लटक रहे थे। तोते के मुंह में पानी भर गया। तोते को आम बहुत पसंद थे। तोते ने आम पाने के लिए सोचा।
तोते ने स्वयं से कहा, " मैं एक बड़ा रस भरा आम चाहता हूं। मैं बहुत देर से उड़ते हुए थक गया हूं। इस तरह मैं आम को खाते हुए आराम कर सकता हूं।"
तोता पेड़ पर नीचे उतरा। वह शाखा पर बैठने ही वाला था कि उसने सुना " कौवे यहां से चले जाओ यह मेरा पेड़ है।" तोते को आश्चर्य हुआ कि यह कौन हो सकता है।
तोते ने इधर उधर नजर दौड़ाई तभी उसने एक बड़े काले कौवे को देखा। काला कौवा आवाज कर रहा था। " कांव! , कांव! जाओ यहां से इस पेड़ पर मत बैठो।
कौवे की आवाज बहुत तीखी और कठोर थी। तोता नाराज कौए को देठ कर डर गया। इसके बाद तोता वहां से निराश होकर उड़ गया।
जैसे ही तोता उड़ा वह पार्क की ओर गया। उसने पार्क में एक पेड़ की शाखा में एक लाल रंग के गुब्बारे को फंसा हुआ देखा। तोते की मन में एक विचार आया। उसने गुब्बारे की डोर पकड़ी और आम के पेड़ की तरफ ऊंचा उड़ा।
तोते ने कौवे को वही पेड़ पर बैठा देखा जहां उसने छोड़ा था। जैसे ही कौवे ने तोते को देखा उसने दुबारा कांव-कांव शुरु कर दिया। तोते ने कौवे के ऊपर वाली बहुत ऊंची शाखा का चुनाव किया और वहां पर जाकर बैठ गया।
तोते ने अपनी चोंच से गुब्बारे को मारा। एक जोरदार आवाज के साथ धमाका हुआ असल में गुब्बारे को चोंच से मारने की वजह से गुब्बारा फट गया। आवाज से कौवा बहुत डर गया और वह उस पेड़ से उड़ गया।
तोता अपनी योजना से बहुत खुश था। वह स्वयं पर हंसा। सारी रसदार आम का मजा स्वयं लेने का उसको अच्छा समय मिल गया था। वह कौवे को भगाने की अपनी कुशल योजना पर बहुत खुश था।
शिक्षा :- यदि तुम कोई उद्देश्य नहीं रखते हो तो किसी को भी नहीं हरा पाओगे।
4. अनुशासन - हिंदी कहानी story in hindi for kids
अनुशासन मानव जीवन में व्यवस्था का वातावरण बनाता है। जो मानव अनुशासन को स्वीकार नहीं करता उसे अपने मन की चंचलता को दबाने में असफलता ही मिलती है और उसी के कारण वह अपना अध्ययन भी सुचारू रूप से नहीं कर पाता।
वास्तव में अनुशासन ही वह औषधि है जिसे पीकर पठन-पाठन में आनंद आने लगता है तथा परीक्षा में सफलता मिलती है। इसके अलावा अनुशासन दैनिक जीवन में व्यवस्था लाकर मनुष्य में अनेक गुणों का विकास करता है।
अनुशासन से कार्य करने में अनियमितता आ जाती है तथा कर्तव्य और अधिकार का समुचित ज्ञान हो जाता है यह ऐसा गुण है जिससे मानव सबका प्रिय बन जाता है। सच तो यह है कि अनुशासन ही जीवन है।
शिक्षा :- हमें हर वक्त अनुशासन का पालन करना चाहिए।
5. तेनालीराम की बुद्धि story in hindi for kids
विजयनगर के सेनापति के पुत्र हुआ। उसने राजा कृष्णदेव राय और उनके दरबारियों को भोजन के लिए आमंत्रित किया अपना पुत्र होने की खुशी में। राजा और उनके दरबारी नवजात शिशु को आशीर्वाद देने पहुंचे।
राजा बच्चे के पास गए और कहा , " भगवान तुम्हें दीर्घायु दे। ईश्वर करें तुम अपने पिता की तरह एक महान योद्धा बनो।"
तेनाली रमन बुद्धिमान और हाजिर जवाब दरबारी पास में खड़ा था। उसने कहा , " महाराज जी अपने पिता से भी महानतम योद्धा होगा।"
राजा ने तेनालीरमन से पूछा , " तुमने कैसे पता लगाया?" तेनाली रमन ने उत्तर दिया , " मैं उसको देख कर पता लगा सकता हूं।"
कुछ ईर्ष्यालु दरबारियों को तेनाली रमन को अपमानित करने का मौका मिल गया। उसमें से एक ने कहा, " महाराज तेनाली रमन कैसे घोषणा कर सकता है कि बच्चा बड़ा होकर क्या करेगा? "
राजा ने कहा , " हां , तुम सही हो मैं सोचता हूं हमें उसकी परीक्षा लेनी चाहिए। क्या तुम मुझे कोई सलाह दे सकते हो? "
दूसरे दरबारी ने कहा , " हां महाराज मेरे पास परीक्षा देने के लिए एक विचार है। हम दो एक सामान सोने के बर्तन बनाने का आदेश देंगे। एक ठोस सोने का होगा और दूसरा खोखला होना चाहिए।"
इसके बाद हम दोनों बर्तनों को एक समान जंजीरों से छत में बांध देंगे। तब हम तेनाली रमन को दूर से दिखाएंगे। हम उससे बिना छुए पहचानने के लिए कहेंगे कि कौन सा बर्तन खोखला है और कौन सा ठोस ?
राजा कृष्णदेव राय ने अपने नौकरों से परीक्षा के लिए सभी प्रबंध करने को कहा। इसलिए दो सोने के बर्तन सुनार द्वारा बनवाकर मंगवाई गए। उन्हें तेनाली रमन को दिखाने और पहचानने के लिए जंजीर से छत से लटका दिया गया।
इसके बाद तेनाली रमन को बुलाया गया। राजा ने उससे बताने के लिए कहा कि कौन सा बर्तन खोखला है और कौन सा बर्तन ठोस है।
तेनाली ने कहा , " महाराज एक जो दाएं तरफ है वह ठोस सोने का है और दूसरा बाई तरफ जो है वह खोखला है। "
राजा और दरबार में उपस्थित सभी लोग तेनाली रमन के सही उत्तर से आश्चर्यचकित थे। राजा ने उनसे पूछा , " तेनाली तुमने इतनी दूर से बिना छुए हुए सही कैसे बता दिया? "
तेनाली ने उत्तर दिया " महाराज मैंने निरक्षण किया कि एक बर्तन में बंधी हुई जंजीर इसके वजन के कारण तनी हुई थी और दूसरा जो खोखला और हल्का बर्तन था हवा में धीरे-धीरे डोल रहा था।"
इसलिए मैंने इतना देखकर आसानी से पता लगा लिया तनी हुई जंजीरवाला ठोस सोने का बर्तन है और हवा में डोलने वाला खोखले सोने का।"
तेनाली रमन की न्याय कुशलता से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा , " हां तेनाली अब मैं तुमसे सहमत हूं कि तुम देख कर सही न्याय कर सकते हो।"
6. गंगा की कहानी story in hindi for kids
मनुष्य, पौधों और जानवरों को पानी की आवश्यकता होती है। इसलिए लोग कस्बे और गांव नदियों के किनारे बनाते हैं। वह नदियों के पानी से फसल और पेड़ उगाते हैं और जानवरों को पालते हैं। यहां भारत में हमारे देश में बहुत ही लंबी और खूबसूरत नदियां हैं। इन सबमें से गंगा सबसे प्रसिद्ध नदी है। हमारे देश में मनुष्य इसे प्रेम करते हैं और इसकी पूजा की जाती है।
गंगा गोमुख से अपना जीवन आरंभ करती है। गोमुख हिमालय में बर्फ की बनी हुई एक गुफा है।जब बर्फ पिघलती है और पानी बन जाती है। यही पानी छोटी धाराओं में बहता है।
जब गंगा हिमालय से वहां के नीचे आती है ज्यादा से ज्यादा छोटी धाराएं उसमें मिल जाती हैं। इसलिए गंगा बड़ी और बड़ी होती जाती है। वह पर्वतों से बहुत तेजी से नीचे आती है। मैदान तक पहुंचते-पहुंचते गंगा विस्तृत और विस्तृत हो जाती है।
मैदानी क्षेत्र में वह हरिद्वार पहुंचती है। हरिद्वार उत्तराखंड प्रदेश में स्थित है। मैदानी भागों में वह भारत के बहुत से गांवों और कस्बों के बीच से होकर बहती है। उसके दोनों किनारों पर हरे भरे खेत हैं।
मैदान क्षेत्र में बहुत सी नदियां गंगा से मिलती हैं। यमुना और सरस्वती गंगा में इलाहाबाद में मिलती है। इलाहाबाद को अब प्रयागराज के नाम से जाना जाता है और यह उत्तर प्रदेश में स्थित है। इन तीन नदियों के मिलने के स्थान को त्रिवेणी संगम कहते हैं। यह तीर्थ राज प्रयाग भी कहलाता है और यह बहुत धार्मिक जगह है।
बहुत से बड़े शहरों को पार करने के बाद गंगा समुद्र की तरफ जाती है। वह धीरे और धीरे बहती है। जैसे-जैसे वह समुद्र के करीब और करीब पहुंचती है। अंतरिम रूप में यह समुद्र में गिर जाती है।
गंगा की यह लंबी यात्रा ऊंचे पर्वतों से शुरू होकर अंत में बंगाल की खाड़ी में जाकर समाप्त होती है। वह स्थान जहां गंगा समुद्र में जाकर मिलती है गंगासागर कहलाता है और यह कोलकाता में स्थित है।
7. ईमानदार जूते वाला story in hindi for kids
एक बार की बात है देवगढ़ नामक गांव में मोनू नाम का एक आदमी रहता था। मोनू एक जूते बनाने वाला मोची था। मोनू दिन भर मेहनत से अपने जूते की दुकान पर काम करता और पैसे कमाता था।
मोनू की पत्नी घर का सारा काम करती थी और घर का काम खत्म हो जाने के बाद वह मोनू के दुकान पर उसके काम में मदद भी करती थी।
दोनों के मेहनत करने के बाद जो पैसे इकट्ठा होते थे उसे पति और पत्नी अपने बेटे राजू की पढ़ाई में इस्तेमाल करते थे।
मोनू का सपना था कि उसका बेटा एक बड़े से स्कूल में पढ़े परंतु वह जितने पैसे कमाता था उसमें उसका बच्चा राजू एक साधारण प्राथमिक विद्यालय में ही पड़ सकता था। मोनू हमेशा सोचता था कि 1 दिन मेरा भी बेटा जरूर बड़े से स्कूल में पढ़ेगा।
मोनू वैसे ही कम पैसे कमाता था और जब भी उसके दुकान पर कोई आता था मोनू जितना दाम कहता था वह ग्राहक उसमें भी भाव तोल करने लगता था और मोनू को हमेशा अपने हक से कम पैसे मिलते थे।
एक बार की बात है मोनू के दुकान पर एक सुंदर सा लेडीज स्लीपर रखा हुआ था। एक औरत ने आकर मोनू से कहा कि वह कितना सुंदर स्लीपर है इसका दाम कितना है।
मोनू ने उत्तर दिया " मालकिन सिर्फ ₹50 है इस लेडी स्लिपर का दाम। "
इसके बाद उस औरत ने कहा " अरे बाप रे स्लीपर का दाम ₹50 बहुत महंगा है मैं तो तुम्हें सिर्फ ₹30 ही दूंगी।"
मोनू ने विनम्र भाव से कहा " माल मुझे इसकी लागत ही ₹35 पड़ी है तो मैं आपको ₹30 में कैसे दे दूं।"
उस औरत ने फिर से उत्तर दिया की " मैं तो तुम्हें सिर्फ ₹40 दे सकती हूं उससे ₹1 अधिक मैं नहीं दूंगी।"
मोनू सोचने लगा कि अगर उसने यह चप्पल नहीं भेजी तो आज उसके परिवार को भूखा ही सोना पड़ेगा। इसलिए उसने उस मालकिन से कहा ठीक है मालकिन चप्पल ले लीजिए और मुझे ₹40 दे दीजिए।
इस तरह मोनू को हर बार अपने लागत और अपने हक से कम पैसे मिला करते थे परंतु मजबूरी में उसे वह कम पैसे में ही अपना काम करना पड़ता था। ऐसा ही रोज रोज चलता गया।
एक दिन मोनू की चप्पल की दुकान पर एक सेठजी आए है। सेठ जी का चप्पल टूट गया था। सेठ जी ने मोनू से कहा - " मोनू मेरे चप्पल टूट गया है तुम इसे जरा बना दो। "
मोनू ने कहा सेठ जी आप बस 10 मिनट इंतजार कीजिए मैं अभी से बना देता हूं। इसके बाद मोनू उस चप्पल को ठीक करने में लग गया।
सेठ जी अपने साथ एक बक्सा लेकर आए थे उन्होंने बक्सा रख दिया और वहीं मोनू की दुकान के पास एक स्टूल पर बैठ गए।
कुछ देर बाद मोनू ने चप्पल बना दी और मोनू ने सेठ जी को चप्पल दे दी। इसके बाद सेठ जी ने पूछा कितने रुपए हुए मोनू। मोनू ने कहा ₹5 सेठ जी। सेठ जी बोले इतना ज्यादा मैं तो सिर्फ तुम्हें तीन ही रुपए दूंगा। मोनू ने व ₹3 ले लिए।
इसके बाद सेठ जी वहां से चले गए। सेठ जी के जाने के बाद मोनू ने देखा कि सेठ जी अपना लाया हुआ बक्सा वही भूल गए हैं।
मोनू को एक सेकेंड के लिए लालच आया कि इसमें पैसे हो सकते हैं मैं इसे रख लेता हूं लेकिन फिर मोनू ने सोचा कि यह मेरे पैसे नहीं है मैं इसे नहीं रखूंगा मैं सेठ जी को यह बकसा वापस लौटा दूंगा।
मोनू सेठ जी को ढूंढते हुए निकल पड़ा। आगे जाने के बाद मोनू को सेठ जी एक हलवाई की दुकान पर मिले सेठ जी हलवाई की दुकान पर गुलाब जामुन खा रहे थे।
इसके बाद उन्होंने सेठ जी उनका बक्सा लौटा दिया सेठ जी बहुत खुश हुए उन्होंने कहा मोनू मैंने तो तुमको कम पैसे दिए थे लेकिन फिर भी तुमने मेरा बक्सा मुझे लौटा दिया क्या तुम्हें थोड़ी सी भी लालच नहीं आया।
मोनू ने विनम्र भाव से सेठ जी को कहा " मुझे लालच तो आया था लेकिन फिर मैंने सोचा कि यह बकसा मेरा नहीं है यह जिसेके हैं मैं उसे लौटा दूंगा। "
मोनू ने सेठ जी को बक्सा दे दिया। सेठ जी ने कहा मोनू यह बक्सा मेरे लिए बहुत ही उपयोगी है। इसमें लाखों करोड़ों के हीरे और जेवर रखे हुए हैं। अगर यह बक्सा खो जाता तो मेरा बहुत ही बड़ा नुकसान हो जाता और मैं सड़क पर भीख मांगने लायक हो जाता।
इसके बाद सेठ जी ने मोनू से पूछा बताओ मोनू तुम्हें क्या इनाम में चाहिए तुम जो मांगोगे मैं तुम्हें वह दूंगा ही।
मोनू ने कहा नहीं नहीं सेठ जी मुझे कुछ नहीं चाहिए।
सेठ जी ने कहा " नहीं ऐसा मत बोलो तुम्हें कुछ तो इनाम में मुझसे लेना ही पड़ेगा बताओ तुम्हें क्या चाहिए। "
मोनू सोचने लगा कि वह क्या मांगे तभी उसके दिमाग में अपनी सोच की बात आई कि वह चाहता था कि उसका बेटा एक बड़े स्कूल में पढ़े वही सामने ही वही स्कूल था तो वह उसी स्कूल की ओर देखने लगा।
सेठ जी मोनू को उसे स्कूल को देखते हुए समझ गए। सेठ जी ने मोनू से पूछा बताओ मोनू उस स्कूल से जरूर तुम्हारी कोई ख्वाहिश है बताओ मुझे।
मोनू ने सेठ जी को बताया कि उसका एक सपना था कि उसका बेटा बड़े स्कूल में पढ़े परंतु उसकी हैसियत ना होने के कारण वह उसे नहीं पढ़ा सकता।
इसके बाद सेठ जी उस मोनू को स्कूल के अंदर ले गए और उन्होंने उसके बच्चे का उसी स्कूल में दाखिला करवाया बाहर दोनों हंसते हुए आए इसके बाद बाहर आने पर सेठजी ने मोनू से कहा कि अब तुम अपने बेटे की पढ़ाई का चिंता मत करो उसके जीवन भर की पढ़ाई का खर्चा मैं उठाऊंगा।
मोनू बहुत प्रसन्न हुआ और उसने सेठ जी का अभिवादन किया।
शिक्षा - ईमानदारी का परिणाम हमेशा अच्छा होता है।
8. जादुई बर्तन story in hindi for kids
1 बार तारा नाम की छोटी सी लड़की थी। वहां अपनी माता के साथ रहती थी। वह बहुत गरीब थे। एक दिन वह जंगल को गई। वहां पर उसे एक बूढ़ी औरत मिली।
बूढ़ी औरत ने उसे एक बर्तन दिया। उसने कहा, " यह एक चमत्कारी जादुई बर्तन है यह तुम्हारे लिए दलिया पकाएगा जब तुम कहोगी , पकाऊ- बर्तन- पकाओ और यह दलिया बनाना बंद कर देगा जब तुम कहोगी रुको- बर्तन-रुको।"
तारा बहुत खुश थी। वह भागती हुई ( दौड़ती हुई ) अपनी माता के पास गई और कहां " माता , अब हम और लंबे समय तक भूखे नहीं रहेंगे क्योंकि मैंने एक चमत्कारी बर्तन प्राप्त किया है।
तारा ने बर्तन से कहा - "पकाओ बर्तन पकाओ" और बर्तन ने दलिया पका दिया, उसकी माता बहुत खुश थी और दोनों ने दलिया खाया।
एक दिन जब तारा बाहर चली गई, उसकी माता को भूख लगी उसने बर्तन से कहा "पकाओ बर्तन पकाओ" बर्तन ने दलिया पकाना आरंभ कर दिया। खाने के पश्चात उसकी माता सही शब्दों को भूल गए और कहा "बर्तन मत पकाओ।"
इतना कहने के बाद भी बर्तन पकाता रहा शीघ्र ही दलिया फर्श से ऊपर आना आरंभ हो गया। माता ने पुनः कहा " ठहरो और ज्यादा मत पकाओ" परंतु बर्तन नहीं रुका।
माता घर से बाहर दौड़ी और दलिया ने उसका पीछा किया। शीघ्र दलिया प्रत्येक जगह पर था। पूरे गांव नें यह देखा। पूरा गांव दलिया खाने के लिए दौड़े।
जब तारा वापस लौटी उसने देखा कि सड़क दलिए से भरी हुई थी वह घर की तरफ दौड़ी जितना तेज वह दौड़ सकती थी।
तारा ने माता को चिल्लाते हुए सुना , " तारा यह बर्तन पका रहा है और यह रुकता नहीं है।"
तारा ने पुकारा " रुको बर्तन रूको " और बर्तन ने दलिया पकाना बंद कर दिया।
शिक्षा :- जिस वस्तु के बारे में पूरी जानकारी ना हो उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
9. अनोखे मित्र story in hindi for kids
एक बार, एक गुलिवर नाम का नाविक था। वह अपने साथी यात्री के साथ एक लंबी यात्रा पर गया। एक दिन समुद्र में एक भयानक तूफान आया था।
उसका जहाज डूब गया लेकिन गुलिवर तैरकर द्वीप के समीप आ गया। यह लिलीपुट दिप था। वह बहुत थका हुआ था। जब वह वहां पहुंचा वह जल्दी से सो गया।
जब वह सो रहा था तो सौ छोटे लोग वहां आए और उसे रस्सियों से बांध दिया। जब वह जागा वह उन छोटे लोगों को देखकर विस्मित हुआ लेकिन जल्दी ही वह छोटे लोग उनका मित्र बन गए।
उन्होंने रसिया खोल दी और उसे भोजन दिया। उनकी पावरोटी इतनी छोटी थी कि उसने एक समय में 10 पाव रोटी खा ली। एक दिन के भोजन उसने 1000 पावरोटी सौ फूल गोभी और सौ भीड़ खा खाली।
छोटे लोग उसे अपने राजा और रानी के पास ले गए। राजा का हाथ इतना छोटा था कि उसे हिलाने के लिए उसने केवल अपनी एक उंगली का प्रयोग किया। सब कुछ इतना छोटा था कि वह लिलीपुट के छोटे लोगों के बीच एक राक्षस के समान लग रहा था।
यह छोटे लोग बहुत ही दयालु और सहायक थे। उन्होंने उसके लिए एक नाव बनाई। यह समय था जब गुलिवर को अपने घर जाना था। वह भी अपने प्यारे दोस्तों को छोड़ते समय दुखी था।
इसलिए वह नाव में बैठ गया और चल दिया। जैसे ही छोटे लोगों ने बहते हुए उसे अलविदा कहा वह नदी में गिर गया और वह मर गया। उसके नदी में गिरने का कारण यह था कि छोटे लोग ने जो नाव बनाई थी वह भी बहुत छोटी थी और वह उसका वजन सह नहीं पाई।
10. तेनालीराम का ऊंट story in hindi for kids
एक बार राजा कृष्णदेव राय तेनाली रमन की हाजिर जवाब टिप्पणी से बहुत प्रभावित हुए। वे इतने खुश हुए थे कि उन्होंने कहा , " तेनाली आज तुमने मुझे खुश कर दिया है। मैं तुम्हें एक संपूर्ण कस्बा उपहार के रूप में देता हूं।
तेनाली ने धन्यवाद के साथ नतमस्तक किया। अनेक दिन गुजर गए परंतु राजा ने अपने वायदे में कुछ नहीं किया वास्तव में वह अपना वादा भूल चुका था। तेनालीराम ने राजा के वायदे को याद दिलाना विचित्र महसूस किया परंतु वह हमेशा राजा को अपना वादा याद दिलाने का एक मौका खोज रहा था।
एक दिन एक अरबी ने विजयनगर की यात्रा की। वह अपने साथ एक उूंट लाया था। बहुत लोग ऊंट को देखने के लिए एकत्र हो गए क्योंकि उन्होंने इस जानवर को पहले कभी नहीं देखा था। राजा कृष्णदेव राय और तेनाली रमन भी इस अद्भुत जानवर को देखने गए।
राजा ने ऊंट को देखा और कहा , " वास्तव में ऊंट एक अद्भुत जानवर है। इसकी इतनी लंबी गर्दन और उसकी पीठ पर कूबड़ है। मुझे आश्चर्य है कि भगवान ने इतना अदभुत और कुरूप जानवर क्यों बनाया "?
इस प्रकार तेनाली को भी मौका मिला जिसके लिए वह लंबे समय से इंतजार कर रहा था। जैसा कि वह हमेशा अपना हाजिर जवाब उत्तर के लिए तैयार रखता था।
तेनाली ने कहा , " महाराज मैं सोचता हूं कि यह ऊंट पिछले जन्म में एक राजा था। उसने किसी से वायदा किया होगा कि वह उसे एक कस्बा देगा और अपने वायदे के बारे में भूल गया हो तभी भगवान ने अवश्य राजा को इस कुरूप में बदल दिया दंड के रूप में।"
ऐसा कहने से तब राजा को ज्ञान हुआ कि तेनालीराम ने उसे उस वायदे को याद दिलाया था जो उसने पूरा नहीं किया था। राजा अपने महल लौटा और अपने मुनीम को तेनाली रमन के लिए कस्बा उपहार देने की व्यवस्था करने को कहा।
इस प्रकार इस व्यवस्था को तभी क्रिया अंतरित किया गया है। तेनाली रमन ने एक बार पुनः उसकी हाजिर जवाबी और बुद्धिमता से उसे लाभ प्राप्त हुआ। इसके बाद वह राजा को धन्यवाद दिया और चला गया।
11. शिकारी का वफादार कुत्ता story in hindi for kids
एक बार की बात है एक शिकारी था। वह एक गांव में रहता था। उसके पास अपना एक उसका पालतू कुत्ता भी था। वह कुत्ता शिकारी का काफी अधिक वफादार था। एक दिन वह शिकारी अपनी पत्नी के साथ शहर गया।
उसने अपने बेटे को अपने घर पर ही कुत्ते की रखवाली में छोड़ दिया। शिकारी के जाने के बाद। वहां पर अचानक एक लोमड़ी आ गया। वह घर के अंदर घुसा और शिकारी के लड़के पर आक्रमण कर दिया।
उस कुत्ते ने उस लोमड़ी को पकड़ लिया और उसे लड़ते हुए लोमड़ी को मार गिराया।
शाम की वक्त जब शिकारी और उसकी पत्नी शहर से वापस अपने घर लौटी। उन्होंने देखा कि कुत्ता घर के बाहर बैठा हुआ था और अपने मालिक का इंतजार कर रहा था। जब उसने मालिक को देखा तो वह उसके पैर चाटने लगा।
जब उस शिकारी ने उस कुत्ते के मुंह में खून के निशान देख तो वह चौक गया। शिकारी सोचने लगा कि कुत्ते ने उसके बेटे को मार दिया। शिकारी बहुत ही गुस्से में आ गया और उसने अपनी बंदूक उठाई और उस कुत्ते को मार डाला।
जब शिकारी और उसकी पत्नी अंदर पहुंचे तो उसने देखा कि उसका लड़का तो सुरक्षित है और वहीं पास में एक लोमड़ी मरा हुआ है।
इतना सब देखने के बाद शिकारी समझ गया कि कुत्ते ने ही उसके बेटे की जान बचाई है लोमड़ी को मारकर। शिकारी बहुत जोर जोर से रोने लगा कि उसने अपने इतने वफादार कुत्ते क्यों क्यों मार दिया। इसी गम में शिकारी उदास रहने लगा।
शिक्षा :- हमें बिना सोचे समझे कोई भी कदम नहीं उठाना चाहिए।
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